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रविवार, 15 सितंबर 2019

आस्तीन का सांप,लेकिन उसका दरियादिल यार, नई कहानी।


जैसा की आप सब जानते है कि हर एक व्यक्ति
के जीवन मे एक ना एक आस्तीन का सांप ज़रूर होता है,
उसी आस्तीन के सांप की कहानी बताता हूँ,
एक बार की बात है कि एक बहुत बड़े व्यापारी अपने जीवन की,
.....सबसे बड़ी तरक्की वाली सीढ़ी पर पहुचने वाला था,व्यापारी का नाम था गौतम।
अपनी जीवन की पूरी दस साल की मेहनत उसने अपनी कम्पनी को
बेहतर बनाने के लिये लगा दिये,अब जब बिल्कुल उसकी कंपनी इंटरनेशनल कंपनी बनने वाली थी,तो उसने एक फ़ैसला लिया कि 
उसको अपनी कंपनी को एक भरोसेमंद ईमानदार दोस्त की ज़रूरत थी,तो उसने अपने एक मित्र को सारे राज़ बता दिये और उसे कंपनी का मैनेजर बना दिया,
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उसका मित्र बहुत ही खुश था,कि वो अपने जीवन मे अपने दोस्त की वजह से कुछ बन चुका था,अब उसके पास एक अछी गाड़ी,एक फ्लैट और कई आरामदायक चीजे मिल चुकी थी,अब उसे दिनो
दिन और ऐश और आराम की लालसा होने लगी,अब उसे कंपनी के सारे राज पता थे तो उसने अन्दर ही अन्दर कंपनी की ज़रूरी बाते जो सिर्फ कुछ खास लोगो को पता थी उन्हे किसी और कंपनी के साथ साँझा करना चालू कर दिया व मोटी रकम लेने लगा, अब दिनो दिन गौतम की कंपनी डूबती रही और बाकी कंपनी लगातर उसके तरीको को अपनाकर आगे बढती रही,अब उसने यह कभी नही सोचा था कि उसकी कम्पनी इतने से दिनो मे गिर जायेगी,अब यह सोचना था कि इसका क्या कारण रहा है,
अब उसने एक बात मान ली थी कि बुरे दिनो को टालना सम्भव नही है,लेकिन आस्तीन के सांप को पहचानना बहुत ज़रूरी था,उसने अपनी कंपनी के रिकॉर्ड देखने चालू किये तो उसने देखा कि जितनी उसकी कंपनी जितनी निचे गिरी है उतनी ही एक कंपनी की तेजी से तरक्की हुई है,अब उसने देखा है कि उसके मित्र के उस कंपनी के मालिक के साथ आना जाना लगातर बढा  है,उसकी जानकारी निकाली तो पता चला की वो लालच का शिकार हो चुका था,अब गौतम ने उसको समझाने के बजाये अपने दिमाग से काम लिया तो पाया कि अगर व वापिस कंपनी गी गोपनियता सिर्फ अपने तक रखे और उसके मित्र को गलत चीज़ बताये तो सब यकीन मे बदल जायेगा,
यूँ ही हुआ करीब दो महिनो के बाद,गौतम की कंपनी वापिस उसी मुकाम पर पहुंच गई जहाँ से वो वापिस गिरी थी,
अब सामने वाले कंपनी के मालिक ने गौतम के मित्र का सब के सामने सच बता दिया और धोखेबाजी का आरोप लगा दिया,गौतम ने यह सब अपनी आंखो से देखा और उसकी आंखो मे से आँसू की बौछार शुरु हो गई, उसने अपने मित्र को उसके पद से हटाकर एक बात कही,कहते तो कंपनी तुम्हारे नाम कर देता,लेकिन आज इस कंपनी से बाहर करना मेरी मजबूरी है,लेकिन तुम तुम्हारे सब पैसे अपने पास रखो,और मित्रता बरकरार रखना,
अब गौतम के मुंह से एक शायर निकला,
'आस्तीन के सांप को पाला नही जाता,
जैसे बुरे वक्त को टाला नही जाता।'
आप भी ऐसे आस्तीन के सांपो से बचकर अपने जीवन को गुप्त व सही रास्ते मे चलते रहे।
आपका अपना ,
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शनिवार, 14 सितंबर 2019

कहने को तो सब कुछ मिटी है,पर यहाँ कुछ और था।जाने

यह दुनिया एक दुसरे का समय देखकर उसका साथ देने या
नहीं देने का फैसला करती है लेकिन इसी दुनिया मे कुछ लोग
ऐसे भी है जो खुद की प्रवाह किये बिना लोगो का साथ देते है,
ये बात उनके लिये ही है कि
'राख हूँ,खाक हूँ,
पर हर वक्त,अपनो का
देता साथ हूँ '
ऐसे ही एक फकीर स्वभाव के व्यक्ति की बात बताने जा रहा हूँ,
एक बार की बात है कि एक नौजवान हमेशा ही गांव के चौक पर
बेठा रहता था,उसके माता पिता उसे बचपन मे छोडकर ही चले गये
थे,उसे जो कोई भी बुलाता वो उसके साथ जाकर काम मे हाथ बटाता,हालाकि वो कोई गरीब व्यक्ति नहीं था,लेकिन वो सबके काम
आना आता था,जब कभी उसकी बात होती तो सभी के मुहं पर उसकी तारीफ होती,अब एक दिन ऐसा आया कि,नौजवान को कुछ
पैसो की ज़रूरत पड़ी,लेकिन उसके पास उस वक्त पैसे नही थे,तो उसने मदद मांगनी चालू की, उसे पुरे गांव ने पैसे देने से इनकार कर दिया और तर्क यह दिया कि नौजवान पैसे लौटा नहीं पायेगा,
वह निराश होकर घर गया और सो गया,
अब वह अगले दिन,उसी चौक पर जाकर बेठ गया लेकिन कोई उस से मदद नही मांग रहा था,क्योकिं सब को शर्म आ रही थी कि बिना उसकी मदद करे,हम मदद केसे मांगे, www.Atulthepoet.blogspot.com
वह वहाँ ही बेठा था,कि इतने मे उसकी आंखो के सामने गांव का मुखिया पास के एक कुए मे फिसलकर गिर गया, अब वहाँ खड़े कोई व्यक्ति की कुए मे उतरने की हिम्मत नहीं थी,तो कुए मे से आवाज आई कि मैं मरने वाला हूँ,मुझे निकलो मै तुम्हे धन दूँगा,
लेकिन सबको पता था की कुए मे मुखिया तो बच गया लेकिन हम वापिस आएगें या नहीं,सब वहाँ से जाने लगे और कहने लगे की कोई इलाज नही बहुत गहरा कुआ है,तभी नौजवान ने एक रसी को खुद से बांधकर और एक मजबूत पेड़ के बाँध दी,वह मानो किसी बन्दर की तरह कुए मे उतरा और अन्दर जाकर देखा कि मुखिया जी तो रो रहे है,उन्हे बुलाया की मुखिया जी चलो बाहर चले,ये सुनकर मुखिया खुश हुआ कि कोई उसकी मदद करने आया है,नौजवान ने मुखिया का हाथ पकड़, एक हाथ से रसी को खेंच खेंच कर मुखिया को बाहर निकला लिया,लेकिन उसका हाथ पुरा लहू-लुहान हो गया,
ये देखकर मुखिया ने उसे गोद ले लिया और गांव का नया मुखिया बना दिया,उसकी ज़मीन से जुड़ी परवर्ती ने उसे आसमान तक पहुचा दिया,आप भी ऐसे ही ज़मीन से जुड़े रहे और इस कहानी को और लोगो तक पहुचाये।
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शुक्रवार, 13 सितंबर 2019

गुमसुम रहने लगे हो आजकल ,देखो ये कहानी !!!

एक बार की बात है, एक परिवार मे चार सदस्य थे,
चारो के पास एंड्रॉइड फोन थे,सभी अपने अपने फोन मे व्यस्त रहते थे,खाना खाते वक्त जो परिवार का प्रमुख यानि कि गौतम का पिता अपने करोबार के सिलसिले मे अपने किसी दोस्त से कारोबार की बात कर रहे थे, वहीं गौतम का बड़ा भाई चैट्स मे व्यस्त था,उनकी माता जी भी अपनी बहन के साथ बात कर रही है और सभी साथ मे खाना खा रहे थे,अब गौतम उम्र मे छोटा था तो उसे फोन मे गेम खेलना ही आता था परन्तु वह खाने खाते समय गेम नही खेल सकता था,उसने अपने फोन को अपने कमरे मे चार्ज लगा रखा था,अब सभी ने साथ बेठ के खाना तो खाया लेकिन गौतम के सिवाए उसके भाई और उसके पिता को यह भी नही पता था कि उन्होने क्या खाया है,अब दिनो दिन ये सिलसिला चलता रहा,पास रहकर भी सभी एक दुसरे से दूर होते रहे,अब एक दिन गौतम को यह अहसास हुआ की उसके परिवार मे एक दुसरे के लिये स्नेह धीरे धीरे खत्म हो रहा था,
तो उसने एक दिन अपने दादा जी को उनके गावँ फोन करके ये सारी बाते बतायी,उसके दादाजी ने इन सब बातो को गम्भीर तरीके से सोचा तो उन्हे ये बात गौतम की सही लगी क्युकी गौतम के पिता उसके दादा जी से बहुत ही कम बात किया करते थे,तो उन्होने शहर जाने का फैसला लिया,उन्होने गौतम को समझाया कि वो इस बात को गुप्त रखे की वो शहर आ रहे है, गौतम ने इस बात का ध्यान रखते हुए घर पर कुछ नही बताया, लगभग 3 दिन बाद उसके दादाजी शहर आ गये,सुबह सुबह घर की दरवाज़े की घंटी बजी तो सभी के कान खड़े हो गये,गौतम ने जाकर दरवाजा खोला तो खुशी से झूमते हुये बोला की 'दादा जी'आप!!
ये सुनते ही सभी की आँख खुली और जल्दी से बाहर आये तो देखा की सुबह के 7 बजे है और इतने जल्दी दादा जी केसे आये है,
गौतम और उसके पिताजी ने दादा जी के पैर छुए और चाय बनाने के लिये आवाज लगायी,चाय बन रही थी तो दादा जी से इतने जल्दी आने की वजह जानने की उत्सुकता सभी के मन मे थी,तो गौतम के पिताजी ने पुछा की आप यहाँ,कोई समस्या तो नही,
तो दादाजी ने कहा कि मुझे मेरे परिवार की याद आ रही थी तो मै आ गया, दादा जी एक सेवानिवृत फौज के अफसर थे,तो उनके रूतबे के आगे सभी की नज़र निचे रहना लाज़्मी था,
सभी को दादाजी के आने के बाद मन मे एक भय रहने लगा की अगर दादाजी को कोई बात पसंद नही आयी तो उनके घुस्से का शिकार होना पड़ेगा,
सभी ने अपने अपने फोन का इस्तेमाल करना कम कर दिया, दादाजी को आये 4 दिन हुए की सभी को फोन की केद से आजादी मिल रही थी,लेकिन गौतम के सिवाए सभी को घुटन महसूस हो रही थी, अब चौथे दिन शाम को दादाजी की असली कहानी की शुरुआत हुई,अब सब खाना खा रहे थे तो उन्होने सभी से एक सवाल पुछा कि,
इतने गुमसुम क्यो हो सभी, क्या कोई समस्या है बताओ मुझे,अब सभी ने फोन का इस्तेमाल नही किया इतने दिन बाहरी बाते उनके दिमाग मे नही थी,उन्हे खुद से मिलने का मौका जो मिला था,
अब गौतम के पिता ने चूपी तोड़ी और बोले पिताजी काम मे इतना व्यस्त रहता हूँ कि मैं अकेला महसूस करता हूँ,गौतम के बड़े भाई ने बताया की मुझे भी पढाई मे बहुत मुश्किले आ रही है,कुछ समझ नही आता,गौतम की माता जी बोली मुझे भी आजकल घुटन होती है कि मेरी बहन से मिले मुझे बहुत समय हो गया,मुझे उस से मिलने की इच्छा रहती है,इन सब बातो मे गौतम बड़े ध्यान से सुन रहा था,ये बाते उसके दादाजी ने उसे समझाई थी कि सब ऐसी बाते बोले तो अन्त मे तुम्हे ये बात बोलनी है,वैसा ही हुआ गौतम ने कहा,
कि 'दादाजी!! ये सब झूठ बोल रहे है ऐसी कोई बात नहीं है,"
ये सुन सब के कान खड़े हो गये और गौतम से सवाल किया की तुम ये क्या बोल रहे हो,हम तुमसे बड़े है,हम झूठ क्यूँ बोलेगे,
तो गौतम ने कहा की आप सब को इतनी समस्या है तो आपने एक दुसरे को क्यूँ नही बतायी,इन बातो का तो इलाज सम्भव था,तो सभी सोच मे डूब गये की केसे!!
तो दादाजी ने हँसते हुये कहा की गौतम सही कह रहा है,इतनी सी बात के लिये गुमसुम क्यो थे तुम,तुम्हारी हर समस्या का इलाज तुम खुद हो,
तो दादाजी ने समझाया कि अगर की अगर तुम ध्यान से समझो तो बहू तुम्हे गौतम के साथ अपनी बहन से मिलकर आ सकती थी,गौतम के पिता अपना अकेलापन अपने बड़े बेटे को पढाकर दूर कर सकता था,इलाज इतना सरल था की सुनकर सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया,
तब दादाजी ने एक बात कही,
कि गुमसुम रहने से अछा है की आप आपके पास रहने वाले से बात का जिक्र करो,तो हर समस्या का हल है, और अपने फोन से इन बातो का इलाज सम्भव नही,तुम जिस से अकेलापन दूर करने की बात सोचते हो,वो ही तुम्हे अकेला होने पर मजबूर करता है,
जब ये बात उन्होने समझ के अमल मे लायी तो उनका जीवन अगले 15 दिनो मे सुधर गया,
दादाजी का सभी ने धन्यवाद किया और उनका मार्गदर्शन करते रहने की गुजारिश की,
अब ये सब देख गौतम बहुत खुश था,और जाते वक़्त उसने अपने दादाजी जी से एक बात कही,
वो बात कभी अगली कहानी मे जिक्र करेगें,
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बुधवार, 11 सितंबर 2019

क्या सचमुच पैसा ही सबकुछ है ? देखो केसे पैसा भावो मे बिक गया।

हम इन्सान है और इन्सान मे भेद-भाव पेदा करना ही सब से पहली सोच रही है,हमे बाँटे रखने के लिये सदियो से रीति रिवाज़ चलन मे है,जो की इन्सान को इन्सान से दूर करता है,वेसे ही आज के समय मे जहाँ जातिवाद कम हुआ की पैसे से व्यक्ति की पहचान होने लगी,अब जिसके पास पैसा वो बलवान,वो ही अपनी जिन्दगी बिना भेद-भाव के अपने पैसो के दम पर जी सकता है,लेकिन हाल ही मे हुई एक घटना ने मुझे सोचने को मजबूर कर दिया कि क्या पैसा सबकुछ है,तो चलो आप को वो कहानी बताता हूँ,
हुआ कुछ यूँ कि एक गर्मी के दिनो की एक सुन्दर सी सुबह थी,और सभी अपनी देनिक दिनचर्या मे व्यस्त थे,तभी
एक सेठ जी मुख लटका के बड़ी उदासी से अपने घर से निकले और पास के किसान के घर जाके ब्याज देने के लिये किसान को कहा,
किसान ने कहा कि आप कुछ मिनट रुकिये मै लेकर आता हूँ,
तभी सेठ की नज़र उसके घर पर पड़ी तो उसने देखा की उसके दो पुत्र खेत जाने की तैयारी कर रहे है और बड़े हर्ष और उल्लास के साथ खेत जा रहे है,दोनो पुत्रवधु एकसाथ मिलकर काम कर रही है और जल्दी जल्दी काम खत्म करने की कोशिश कर रही है,सभी घर के पशु और पालतू जानवर हस्ट पुष्ट नज़र आ रहे थे,
ये सब देख सेठ का मन खुश हो गया और मन की उदासी को वो भुल गया,इतने मे किसान के दो पोते सेठ के पास चाय ले आये और पास आकर बेठ गये व उनसे बाते करने लगे,बच्चो की बातो ने सेठ को हंसने पर मजबूर कर दिया,ये सब घटनाएँ एक वक़्त मे थम सी गई जब किसान ब्याज के पैसे लेके आया,
सेठ ने पैसे नहीँ लिये और कोई ज़रूरी काम याद आग्या, कहकर चला गया,किसान को ये बात कुछ समझ नहीं आयी। अब जब भी सेठ उदास होता वो किसान के घर चला जाता और खुश होकर लौट के आता,
ये सब इतेफ़ाक नहीं,ये किसान को समझ आ गया,
एक दिन जब सेठ आया तो किसान ने उस से पुछ लिया की क्या बात है सेठ जी, इतना समय हो गया आपने ब्याज नही लिया,
तो सेठ जी ने उस किसान को अपनी जीन्दगी के बारे मे बताया की मै अकेला रहता हूँ,मेरा सारा परिवार अपने अपने काम से शहर मे रहते है, मेरे बेटे मुझसे सिर्फ काम की बात करते है व भाई भाई एक दूसरे की टाँग खीचते है ,मेरे पोतो को मेने 6 महिने पहले देखा था,अब वो भी होस्टल मे रहते है,मेरी बीवी मुझे छोडकर भगवान को प्यारी हो गई, तब से मै बहुत अकेला महसूस करता हूँ,
ये सब सुन किसान की आँख में आँसू आ गये,और ब्याज सेठ को देने लगा तो सेठ ने सुनहरे शब्द कहे,
*ब्याज तो मै तुमसे कब का ले रहा हूँ *
मेरी जिन्दगी मे पैसो की कमी नही बल्कि खुशिओं की कमी है,
तो समझ ही गये होगें की पेसा सबकुछ नहीं है,
और भी रोचक कहानी और शायरों के लिये आये वेबसाइट पर,
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