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बुधवार, 18 सितंबर 2019

मान्या - THE GANGSTER (PART-4)


अब मान्या कॉलेज गया तो सबकुछ बदला बदला सा नज़र आ रहा था,हर किसी के ल्फ्ज़ो मे मान्या का ही नाम था,हर कोई मान्या के पास उस से हाथ मिलाने के लिये चला आ रहा था,मानो गेट के पास इतनी भीड़ उमड़ रही थी,जैसे मान्या कोई बड़ा नेता हो,हर तरफ़ उसकी यारी और बहादुरी के किस्से थे,ऐसी स्थिति में मान्या खुद को सही समझने लगा था,उसकी सोच बस बदमास के किरदार मे रुकी हुई थी,अपने दोस्त रवि के साथ अपनी क्लास की और बढते हुए उसे कुछ लड़के किसी लड़के को धका दे रहे थे,मान्या को देख मानो माहौल रुक गया,मान्या ने एक आवाज दी की छोड़ दो उसे,इतना सुनते ही लड़को ने उसे छोड़ माफी मांग ली और वहाँ से दौड़ते हुए चले गये,अब मान्या जब क्लास मे पहुचा तो क्लास लग रही थी,प्रोफ्फेसर ने मान्या को नहीं देखा और अन्दर आने से मना कर दिया कि लेट आने वाले के लिये कोई जगह नहीं है,पीछे मुड़कर देखा तो सारी क्लास खड़ी थी जेसे कोई प्रिन्सिपल आया हो,नज़र पड़ी तो गेट पर मान्या खड़ा था,प्रोफेसर ने मान्या को कहा,
'सॉरी भाईसाब,आइये गलती हो गई'
ये सुन मान्या ने कहा नहीं सर गलती हो गई कल से समय से आऊगा,"
सारी क्लास खड़ी थी,मान्या ने सबको राम राम की बेठने को कहा,
सारी क्लास शान्त थी और प्रोफेसर क्लास छोड़कर प्रिंसिपल के पास गया और बोला,
हमे मान्या को कॉलेज से निकाल देना चाहिए,
प्रिन्सिपल ने कहा,
मन तो बहुत कर रहा है लेकिन मैं मान्या का थपड़ नहीं सह सकता,ये सुन प्रोफेसर के होश उड़ गये,प्रोफेसर चुप चाप वहाँ से चला गया,
उधर क्लास मे मान्या दोस्तो के साथ बेठा था,इतने मे कॉलेज में पुलिस आ गई और मान्या को गिरफ़्तार करने के लिये प्रिन्सिपल ऑफ़िस पहुची,
कि मान्या को बुलाया जाए,गिरिराज को भगाने के आरोप मे मान्या से पूछताछ करनी है,प्रिन्सिपल ने उन्हे क्लास मे जाकर मान्या को गिरफ्तार करने की इजाजत दे दी,
क्लास की तरफ 6 पुलिस वाले बढ रहे थे,कि मान्या एकदम क्लास से बाहर निकला,पुलिस वालो ने मान्या से कहा,
आपसे पूछताछ करनी है,मान्या ने कुछ नही कहा
,हाथ आगे करते हुए मान्या ने गिरफ़्तारी कबूल की,अब हाथ मे हथकड़ी लगे मान्या कॉलेज से निकल रहा था तो सारा कॉलेज इक्कठा हो गया और पुलिस से सवाल करने लगा,कि गिरफ्तारी किस बात की,मान्या ने सजा काट ली और अखबारों मे उसे बरी कर दिया गया है ऐसा लिखा है,तो मान्या ने सब को समझाया कि ये पुलिस-प्रशासन का काम है,आप मत इस तरह दखल दे,पुलिस ये बात सुन दंग रह गई कि मान्या ,उनकी तरफदारी कर रहा है,
अब थाने की और बढते हुए हवलदार ने पुछा,
इतनी अच्छी प्रवर्ति के इन्सान हो तो इन कामो मे केसे पड़ गये,मान्या ने कहा,
समय,समय एक ऐसी चीज़ है जो इन्सान को हेवान और भगवान बनाने मे समय नही लेता,
ये सुन पुलिस के अधिकारी ने वाह वाह की,
अब थाने मे मान्या को पहूंचा दिया गया,मान्या को बड़े पुलिस अधिकारी के पास अकेले बेठा दिया गया और सवाल जवाब चालू हुए,
पहला सवाल मान्या से पुछा गया,
क्या तुम गिरिराज को व्यक्तिगत रूप से जानते हो या जेल मे ही पहचान हुई,
जवाब- नहीं,मै गिरिराज को नही जानता,न ही मेरी जेल मे उस से कोई खास पहचान हुई।
दुसरा सवाल- क्या तुम्हे पता है की गिरिराज कहा गया है,
जवाब- नहीं,उसने मुझे कुछ नही बताया,
सवाल- सुरंग 3 दिन मे नहीं खोदी जा सकती,इतनी कठोर मिटी को खोदने के लिये कम से कम 30 दिन लगते है,तुम सही बताओ,
जवाब- मुझे सुरंग के बारे मे पता होता तो मै खुद भाग जाता।मुझे नही पता था।
सवाल- दबाव बनाकर पूछते हुए अधिकारी ने कहा कि तुम्हारे बिना यह काम नहीं हो सकता?
जवाब- हो सकता है कि सुरंग पहले से हो,मुझे नही पता सर ।
सवाल- सुरंग तुम्हारे बिस्तर के निचे बनी थी,फ़िर भी तुम्हे नही पता,क्यूँ?
जवाब- मै वहाँ नही सोता था,मै पानी के मटके के पास सोता था,मुझे जमीन पर नीन्द आती है।
सवाल-इतनी लम्बी सुरंग,कोई 2 टन मिटी कहां जा सकती है***,तुम्हे कुछ पता है,
जवाब-मिटी.....मिटी का मुझे पता नहीं,अगर आपको लगता है कि मै झूठ बोल रहा हू तो बताईये मुझे गिरिराज को भगाने मे क्या फायदा हो सकता था,?
सवाल-ये भी है,भला तुम्हे क्या फायदा,लेकिन यारी निभाने का शौंक जो है तुम्हे.....
जवाब- हा हा हा,,,,बिल्कुल लेकिन मेने कोई जुर्म नहीं कर सकता,और किसी अपराधी को भगाने मे सहायता नहीं कर सकता सर।।।
ऐसे ही कुछ छोटे बड़े सवाल मान्या से पुछ उसे जाने दिया गया,पुलिस-प्रशासन के प्रती इतनी उदारता देख पुलिस-प्रशासन भी मान्या को सही मानने लगी,।।।
मान्या अपनी मूँछों को ताव देते पुलिस थाने से निकला तो पत्रकार उसका इन्तजार कर रहे थे,
बाहर निकलते ही पत्रकार मान्या की तरफ बढ़े तो पुलिस ने मान्या को एक साइड में कर पुलिस की गाड़ी तक पहूंचा दिया,मान्या ने पत्रकारो को एक बात कही,मै पुलिस-प्रशासन की इज्जत करता हूँ,
और जो सहयोग मुमकिन होगा मै करूँगा,अगले दिन मान्या ने अखबार पढा तो लिखा हुआ था,एक अच्छा इन्सान है मान्या,%% ये देख सारे इलाके मे मान्या की छवि अच्छी हो चुकी थी,लेकिन क्या आपको पता है की सुरंग की मिट्टी कहां गई ,ये राज़ है जो कल बताऊगा आपको......
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मंगलवार, 17 सितंबर 2019

मान्या- THE GANGSTER (PART-3)

मान्या - द गेन्गस्टर ।PART 1ST LINK BELOW
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मान्या_the GANGSTER part 2..LINK BELOW.
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अब एक तरफ जहां पुलिस मान्या को तलाश मे नाकाबंदी कर चुकी थी,मान्या इस बात से अंजान था,क्योकिं मान्या का फोन रवि ने रख लिया था,मान्या अपने किसी दोस्त के पास दुसरे शहर जा रहा था,तो मान्या ने देखा कि आगे सभी बसों की बारी बारी चेकिंग की जा रही है,
मान्या ने मुहं पर कपड़ा लेकर सोने की सोची,अब मान्या की बस मे जब चेकिंग हुई तो हवलदार ने उस बस को जाने के लिये इशारा किया,लेकिन जब बस चली तो मान्या ने कपड़ा हटाया तो उसकी नज़र सामने खड़े हवलदार पर पड़ी जो कि नियम अनुसार थोड़ी दूर बस के साथ जाता है,
कपड़ा दोबारा रखा जाता इतने मे तो हवलदार ने मान्या को देख लिया और मान्या को बिना बताये उसने अपने साथियो को बुला लिया,
लगभग अगली 4-5 मिनट में पुलिस की 2 गाड़ियों ने बस को रुकवा दिया,
हथियार के सहित 3 पुलिस अधिकारी बस में सवार मान्या को बिना हाथ लगाये निचे उतरने को कहा,मान्या उतर गया,
लेकिन जेसे ही मान्या को मान्या को पुलिस की गाड़ी मे बेठने के लिये धका दिया गया तो मान्या ने लाल आंखो से उसे समझाने की कोशिश की कि वो अपने आप बेठ जायेगा,
पुलिस वाले ने ऐंठ के जवाब दिया,
'घूर किसे रहा है,चुपचाप बेठ जा,'
मान्या ने हँसते हुए कहा,'बीमा करा राख्या है के तन'
ये सुनते ही पुलिस वाले ने चुपचाप बेठना सही समझा ,
अब मान्या बिल्कुल शान्ती से थाने पहुंच गया,
उसको एक अपराधी के साथ जेल मे बन्द कर दिया गया,मान्या ने जेल पहले कभी नही देखी थी,
जेल का माहौल देख,मान्या घुटन महसूस कर रहा था,अगले दिन अखबार पढते हुए साथ के अपराधी ने मान्या की खबर सुनाई तो लिखा हुआ था,
' मान्या ,कुख्यात बदमाश गिरफ्तार,पुलिस को धमकी देने का दुसरे आरोप मे सयुंक्त पेशी 3 दिन बाद'
ये सुन मान्या की छवि पुरे इलाके मे बदमाश की हो गई थी,जेल मे भी उसकी छवि सब बदमाश लोगो मे सबसे उपर बन चुकी थी,इलाके मे मान्या का भय हो चुका था,
अब 3 दिन बाद मान्या की कोर्ट में पेशी हुई,दो महिने की सजा और 15000 रूपये का जुर्माना हुआ,व जमानत नही मिलने का प्रावधान किया गया,अब मान्या ने जेसे तेसे 1 महिने सजा काट ली थी,उसके साथ रहने वाले अपराधी की जेल तोड़कर भागने की कोशिश थी,उसने मान्या को बताया की उसकी 3 साल की जेल बाकी है और उसे यहाँ से भागना है,मान्या ने उसकी मदद करने का फैसला लिया,अब रात को मान्या और उसका अपराधी दोस्त जिसका नाम गिरिराज था,एक सुरंग खोदना चालू कर दिया,लगभग 15 दिन बाद वे पास के एक बन्द पड़े नाले तक पहुँच गये,मान्या की सजा अब 3 दिन रही थी,मान्या ने एक प्लान बनया की उसकी सजा पुरे होने के तीन तीन बाद गिरिराज को भागना है,ताकी उस पर किसी को शक ना हो,
मान्या की सजा अब पूरी हो चुकी थी,अब मान्या जेल से बाहर आ गया,उसकी जिँदगी शायद अब सुधरने वाली थी,उसके 3 दिन बाद जब गिरिराज जेल तोड़कर भाग गया तो अगले दिन पूछताछ करने पुलिस मान्या के पास पहुंची तो मान्या ने साफ साफ कुछ भी पता होने से मना कर दिया,पुलिस-प्रशासन को ये बात समझ नहीं आई की अकेला व्यक्ति 3 दिन मे सुरंग बनाकर केसे भाग गया,अब अखबारों मे छ्पी खबरो ने मान्या के दोस्त और मान्या को बदनामी की दुनिया मे उपर पहुंचा गई,
अब जब मान्या जेल के बाद अगले दिन कॉलेज गया तो.......
आगे की कहानी कभी बाद में ।
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रविवार, 15 सितंबर 2019

आस्तीन का सांप,लेकिन उसका दरियादिल यार, नई कहानी।


जैसा की आप सब जानते है कि हर एक व्यक्ति
के जीवन मे एक ना एक आस्तीन का सांप ज़रूर होता है,
उसी आस्तीन के सांप की कहानी बताता हूँ,
एक बार की बात है कि एक बहुत बड़े व्यापारी अपने जीवन की,
.....सबसे बड़ी तरक्की वाली सीढ़ी पर पहुचने वाला था,व्यापारी का नाम था गौतम।
अपनी जीवन की पूरी दस साल की मेहनत उसने अपनी कम्पनी को
बेहतर बनाने के लिये लगा दिये,अब जब बिल्कुल उसकी कंपनी इंटरनेशनल कंपनी बनने वाली थी,तो उसने एक फ़ैसला लिया कि 
उसको अपनी कंपनी को एक भरोसेमंद ईमानदार दोस्त की ज़रूरत थी,तो उसने अपने एक मित्र को सारे राज़ बता दिये और उसे कंपनी का मैनेजर बना दिया,
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उसका मित्र बहुत ही खुश था,कि वो अपने जीवन मे अपने दोस्त की वजह से कुछ बन चुका था,अब उसके पास एक अछी गाड़ी,एक फ्लैट और कई आरामदायक चीजे मिल चुकी थी,अब उसे दिनो
दिन और ऐश और आराम की लालसा होने लगी,अब उसे कंपनी के सारे राज पता थे तो उसने अन्दर ही अन्दर कंपनी की ज़रूरी बाते जो सिर्फ कुछ खास लोगो को पता थी उन्हे किसी और कंपनी के साथ साँझा करना चालू कर दिया व मोटी रकम लेने लगा, अब दिनो दिन गौतम की कंपनी डूबती रही और बाकी कंपनी लगातर उसके तरीको को अपनाकर आगे बढती रही,अब उसने यह कभी नही सोचा था कि उसकी कम्पनी इतने से दिनो मे गिर जायेगी,अब यह सोचना था कि इसका क्या कारण रहा है,
अब उसने एक बात मान ली थी कि बुरे दिनो को टालना सम्भव नही है,लेकिन आस्तीन के सांप को पहचानना बहुत ज़रूरी था,उसने अपनी कंपनी के रिकॉर्ड देखने चालू किये तो उसने देखा कि जितनी उसकी कंपनी जितनी निचे गिरी है उतनी ही एक कंपनी की तेजी से तरक्की हुई है,अब उसने देखा है कि उसके मित्र के उस कंपनी के मालिक के साथ आना जाना लगातर बढा  है,उसकी जानकारी निकाली तो पता चला की वो लालच का शिकार हो चुका था,अब गौतम ने उसको समझाने के बजाये अपने दिमाग से काम लिया तो पाया कि अगर व वापिस कंपनी गी गोपनियता सिर्फ अपने तक रखे और उसके मित्र को गलत चीज़ बताये तो सब यकीन मे बदल जायेगा,
यूँ ही हुआ करीब दो महिनो के बाद,गौतम की कंपनी वापिस उसी मुकाम पर पहुंच गई जहाँ से वो वापिस गिरी थी,
अब सामने वाले कंपनी के मालिक ने गौतम के मित्र का सब के सामने सच बता दिया और धोखेबाजी का आरोप लगा दिया,गौतम ने यह सब अपनी आंखो से देखा और उसकी आंखो मे से आँसू की बौछार शुरु हो गई, उसने अपने मित्र को उसके पद से हटाकर एक बात कही,कहते तो कंपनी तुम्हारे नाम कर देता,लेकिन आज इस कंपनी से बाहर करना मेरी मजबूरी है,लेकिन तुम तुम्हारे सब पैसे अपने पास रखो,और मित्रता बरकरार रखना,
अब गौतम के मुंह से एक शायर निकला,
'आस्तीन के सांप को पाला नही जाता,
जैसे बुरे वक्त को टाला नही जाता।'
आप भी ऐसे आस्तीन के सांपो से बचकर अपने जीवन को गुप्त व सही रास्ते मे चलते रहे।
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शनिवार, 14 सितंबर 2019

कहने को तो सब कुछ मिटी है,पर यहाँ कुछ और था।जाने

यह दुनिया एक दुसरे का समय देखकर उसका साथ देने या
नहीं देने का फैसला करती है लेकिन इसी दुनिया मे कुछ लोग
ऐसे भी है जो खुद की प्रवाह किये बिना लोगो का साथ देते है,
ये बात उनके लिये ही है कि
'राख हूँ,खाक हूँ,
पर हर वक्त,अपनो का
देता साथ हूँ '
ऐसे ही एक फकीर स्वभाव के व्यक्ति की बात बताने जा रहा हूँ,
एक बार की बात है कि एक नौजवान हमेशा ही गांव के चौक पर
बेठा रहता था,उसके माता पिता उसे बचपन मे छोडकर ही चले गये
थे,उसे जो कोई भी बुलाता वो उसके साथ जाकर काम मे हाथ बटाता,हालाकि वो कोई गरीब व्यक्ति नहीं था,लेकिन वो सबके काम
आना आता था,जब कभी उसकी बात होती तो सभी के मुहं पर उसकी तारीफ होती,अब एक दिन ऐसा आया कि,नौजवान को कुछ
पैसो की ज़रूरत पड़ी,लेकिन उसके पास उस वक्त पैसे नही थे,तो उसने मदद मांगनी चालू की, उसे पुरे गांव ने पैसे देने से इनकार कर दिया और तर्क यह दिया कि नौजवान पैसे लौटा नहीं पायेगा,
वह निराश होकर घर गया और सो गया,
अब वह अगले दिन,उसी चौक पर जाकर बेठ गया लेकिन कोई उस से मदद नही मांग रहा था,क्योकिं सब को शर्म आ रही थी कि बिना उसकी मदद करे,हम मदद केसे मांगे, www.Atulthepoet.blogspot.com
वह वहाँ ही बेठा था,कि इतने मे उसकी आंखो के सामने गांव का मुखिया पास के एक कुए मे फिसलकर गिर गया, अब वहाँ खड़े कोई व्यक्ति की कुए मे उतरने की हिम्मत नहीं थी,तो कुए मे से आवाज आई कि मैं मरने वाला हूँ,मुझे निकलो मै तुम्हे धन दूँगा,
लेकिन सबको पता था की कुए मे मुखिया तो बच गया लेकिन हम वापिस आएगें या नहीं,सब वहाँ से जाने लगे और कहने लगे की कोई इलाज नही बहुत गहरा कुआ है,तभी नौजवान ने एक रसी को खुद से बांधकर और एक मजबूत पेड़ के बाँध दी,वह मानो किसी बन्दर की तरह कुए मे उतरा और अन्दर जाकर देखा कि मुखिया जी तो रो रहे है,उन्हे बुलाया की मुखिया जी चलो बाहर चले,ये सुनकर मुखिया खुश हुआ कि कोई उसकी मदद करने आया है,नौजवान ने मुखिया का हाथ पकड़, एक हाथ से रसी को खेंच खेंच कर मुखिया को बाहर निकला लिया,लेकिन उसका हाथ पुरा लहू-लुहान हो गया,
ये देखकर मुखिया ने उसे गोद ले लिया और गांव का नया मुखिया बना दिया,उसकी ज़मीन से जुड़ी परवर्ती ने उसे आसमान तक पहुचा दिया,आप भी ऐसे ही ज़मीन से जुड़े रहे और इस कहानी को और लोगो तक पहुचाये।
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